Worlds Famous | Biography | Who is the Hollywood-Best Actor- Director-Script Writer-Producer-Boxer- Biography Sylvester Stallone (हिंदी में भी)

Sylvester Stallone (Sly Stallone) Struggle Life

It is said that failure is an option in life, which no one wants to adopt, but people adopt it firmly. And he who fights (from failure), fights it, he throws failure out of his life forever.

Actors are seen in the film, who are of reel life. Ever heard of or seen a real-life actor who played with problems as a toy since childhood, he is none other than the world's greatest actor / director / screenwriter / producer Sylvester Stallone (Sly Stallone).

He was born on 06 July 1946 in Washington DC, USA. One part of his face was paralyzed in childhood.

Father name Frank Stallone and mother name Jackie Stallone.

The parents divorced around 1957, due to which it was difficult to make a living and also completed school after going through a very serious condition and had to leave half of college studies.

From childhood, I was very fond of writing screenplay and becoming an actor and financially strong enough to do something to live life. He vowed one day to join his film line and New York City to fulfill his dreams.

Continually gave auditions / screen tests and kept writing scripts. Failure was everywhere everywhere but never lost and disappointed. This went on continuously for 4 - 5 years. In the Meanwhile, he got married too, to run another responsibility home.

There came a time that he also had to sell his wife's jewelry for money and once he had to spend 3 nights in New York bus stand with his dog, which he loved very much.

Time got worse, then he had to stand near the liquor store and sell his dog for only $ 25.

Difficulties did not end here either, one day in the newspaper, film boys need to be seen for that soft porn film. Then he also worked in soft porn film (Adult), which was his strength. (Worked from 1971 to 1974)

One day, while being told, a boxing match was going on in the TV of a street shop (between Muhammad Ali and the Wepner), and he saw a new idea for writing a script related to boxing.

He went home continuously writing the screenplay for about 23 - 24 hours, writing the screenplay over a Struggle boxer, and upon completion gave it the name of the screenplay Rocky.

Then he went to the film producer / producer and director about the script and there was also a rejection and waste.

Eventually the producer found who agreed to buy him the script for $ 100000 dollars, but Sylvester placed a condition that the script would be sold only when I got the lead role and it didn't work out between the two.

A few days later, the producer got a call, he did not accept the $ 200000 dollars screenplay price. Then a few days later the producer put the price from $ 350000 to $ 400000 dollars. Think Salvester was in great need of money, then he did not sell.

And then came the day that was Sylvester Stallone's day, the producer agreed to take him in the lead role but Sylvester immediately said yes to pay $ 35 thousand.

Rocky (1976) made many records in Hollywood cinema, people liked the film so much that Sylvester became a superstar overnight.

The film made for $ 1,000,000 and grossed $ 22, 50, 00,000.

This film received national and many other awards

He again went to the same liquor shop for 3 consecutive days, he stood for hours waiting for the man who had bought his beloved dog and found it one day. The man did not want to sell the dog but in the end had bought his beloved dog, he also sold it for only $ 25 for the entire $ 15,000, because he understood its importance very well.

Later, its five parts Rocky II, Rocky III, Rocky IV, Rocky V and "Rocky Balboa" have been made.

Fact -

It is very easy to put someone's biography into words, but the person who has faced challenges every hour / day and year can only know that.

That is why the person who faces the first sorrows in life gets equal happiness after that. Sylvester Stallone's determination, hard work and dedication made all problems become empty jargon for the pages of history. Courage should never be lost because it is part of the journey of life.

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सिल्वेस्टर स्टैलोन (श्लय स्टैलोन) संघर्ष जीवन

कहते है कि विफलता जिंदगी में एक विकल्प होता है, जिसे कोई भी अपनाना नहीं  चाहता, लेकिन लोग मज़बूरी में अपना लेते है। और जो उससे (विफलता से) लड़ता  है, संघर्ष करता है, वो विफलता को अपने जीवन से हमेशा के लिए बाहर निकाल फेंकता देता है. 

फिल्म में अभिनेता तो देखते है, जो रील लाइफ के होते है. कभी रियल लाइफ के अभिनेता के बारे में सुना या देखा है जो बचपन से समस्याओं को खिलौना समझ के खेला, वो और कोई नहीं विश्व के महान अभिनेता/ डायरेक्टर/ स्क्रीन राइटर/ प्रोडूसर सिल्वेस्टर स्टैलोन (श्लय स्टैलोन) है.

इनका जन्म 06 जुलाई 1946 को वाशिंगटन डीसी, अमेरिका हुआ. बचपन में ही इनके चेहरे के एक भाग में लकवा होगया।

 पिता नाम फ्रैंक स्टैलोन और माता का नाम जैकी स्टैलोन।

1957 के आसपास माता पिता का तलाक होगया, जिसके कारण जीवनयापन करना मुश्किल हो गया था और स्कूल भी बहुत गंभीर हालत से गुजरकर पूर्ण किया और कालेज की पढाई आधी बीच में छोड़ना पड़ा.

बचपन से ही पटकथा लिखने व अभिनेता बनने का बहुत शौख था और आर्थिक रूप से मज़बूरी इतनी ज्यादा थी की जिंदगी जीने के लिए कुछ न कुछ तो करना ही था. उसने एक दिन संकल्प लिया की उसे फिल्म लाइन ज्वाइन करने का और न्यूयोर्क सिटी आगया अपने सपनो को पूरा करने।

लगातार ऑडिशन / स्क्रीन टेस्ट देते गए और पटकथा लिखते गए. हर जगह असफलता ही हाथ लगते गया लेकिन हार और निराश कभी नहीं हुए. यह लगातार 4 - 5 सालो तक चलता रहा..

इसी बीच उन्होंने शादी भी कर ली, एक और जिम्मेदारी घर चलाने के लिए.

एक समय ऐसा आया की उन्होंने अपनी बीवी के गहने भी बेचना पड़ा पैसे के लिए और एक बार वो 3 रातो तक न्यूयोर्क के बसस्टैंड में गुजरा करना पड़ा था, वो भी अपने कुत्ते के साथ जिससे वो बहुत ही प्यार करते थे. 

समय और ख़राब होता गया, फिर उसने शराब की दुकान के पास खड़े हो के अपने कुत्ते को बेचना पड़ा वो भी मात्र 25 डॉलर में.

मुश्किलें यहाँ भी ख़त्म नहीं हुई, एक दिन न्यूज़ पेपर में फिल्म लड़को की आवश्यकता है करके ऐड देखा वो भी सॉफ्ट पोर्न फिल्म के लिए.  फिर उन्होंने  सॉफ्ट पोर्न फिल्म (एडल्ट) में भी काम किया जो उसकी मज़बूरी थी. (वर्ष 1971 से 1974 काम किया)

एक दिन कही जा रहे थे तो रास्ते की  किसी दुकान के टी.वी मे बॉक्सिंग का मैच चल रहा था (मुहम्मद अली और वेपनर के बीच) उसने देखा, जिससे उनको पटकथा लिखने का नया विचार आया बॉक्सिंग से सम्बंधित।

वह घर जाके लगातार पटकथा लिखते रहे लगभग 23 - 24 घंटो तक, जो एक स्ट्रगलर बॉक्सर के ऊपर पटकथा लिख रखे थे और पूरा होने पे उस पटकथा का नाम रॉकी दिया।

फिर वो पटकथा को लेकर फिल्म मेकर/ प्रोडूसर और डायरेक्टर के पास गए वहां भी  अस्वीकार व बेकार है बोला गया.

आखिरकार प्रोडूसर मिल गया जो उसे 1 लाख डॉलर में पटकथा खरीदने को तैयार हो गया था लेकिन सिल्वेस्टर ने एक शर्त रखा स्क्रिप्ट तभी बेचूंगा जब मुझे लीड रोले मिलेगा तब और बात नहीं बना दोनों के बीच.

कुछ दिनों बाद प्रोडूसर का फोन आया उसने 2 लाख डॉलर पटकथा कीमत लगाया फिर भी नहीं माना। फिर कुछ दिनों बाद प्रोडूसर ने 3.5 से 4 लाख डॉलर तक कीमत लगा दिया। सोचो सलवेस्टर पैसे की बहुत जरुरत थी फिर भी उसने नहीं बेचा.

और फिर वो दिन आया जो सिल्वेस्टर स्टैलोन का दिन था, प्रोडूसर उसे लीड रोले में लेने के लिए मान गया लेकिन मात्र 35 हज़ार डॉलर देने की बात कही सिल्वेस्टर ने तुरंत हाँ बोल दिया।

रॉकी (1976) फिल्म हॉलीवुड सिनेमा में कई रिकार्ड्स तोड़ दिया, लोगो फिल्म इतना पसंद आया की सिल्वेस्टर रातो रात सुपर स्टार बन गए.

यह फिल्म 1000000 डॉलर में बनी और 22, 50, 00000 डॉलर कमाई किया।

इस फिल्म को राष्ट्रीय एवं और बहुत सरे पुरुस्कार मिले

वह फिर से वही शराब दुकान के लगातार 3 दिनों तक जाता रहा, वह घंटो खड़ा हो के उस आदमी का इंतजार करता था जिसने उसका प्यारा कुत्ता ख़रीदा था और एक दिन मिल गया. वो आदमी कुत्ता को बेचना नहीं चाहता था लेकिन अंत में अपने प्यारे कुत्ते को खरीद लिया था वो भी पुरे 15 हज़ार डॉलर्स में जिसको वो बेचा था मात्र 25 डॉलर में क्योकि वो इसकी अहमियत को बहुत अच्छी तरह से समझते थे.

आगे चलकर इसके पाँच भाग रॉकी II, रॉकी III, रॉकी IV, रॉकी V और ''रॉकी बैल्बोआ बनाए जा चुके है.

तथ्य -

किसी की जीवनी को शब्दों में पिरोने बहुत आसान होता है लेकिन जिस व्यक्ति ने हर घंटा/ दिन व साल कैसे - कैसे चुनौतियों का सामना किया होगा वो तो सिर्फ वही ही जान सकता है.

इसी लिए कहा गया जिंदगी में जो पहले दुखो का सामना करता है उससे बाद उतना ही सुख मिलता है. सिल्वेस्टर स्टैलोन की दृढ़ निश्चय, कठोर परिश्रम व निष्ठा के आगे सभी समस्या इतिहास के पन्नो के लिए खाली शब्दकोष बन गया. हिम्मत कभी नहीं हारनी चाहिए क्योकि ये जिंदगी के सफर का हिस्सा है.


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