Religious Story | Sri Krishna and Sudama Friendship Story (हिंदी में भी)


Friendship of Lord Kishan and Sudama

Even today, when people have to give example of friendship, Krishna and Sudama would give
Best friend Forever
Sri Krishan & Sudama friendship
friendship only because their friendship should be strong and friendship should be fulfilled both even if the time is opposite to them. It is said in the scriptures.

Lord Krishna was of a rich family and Sudama belonged to the poor Brahmin family (but was rich at first), but his story behind Sudama's poor was to save his dear friend Krishna. It is said in the scriptures that a Brahmini (Lady Priest) who was very poor, used to live by begging daily but at one time it came that he did not get any alms for about 4 - 5 days, then the next day he got some handful of gram (Chickpeas) which put it in your bag. It was too late by the time she reached her hut and Brahmani (Lady Priest) thought that she would not eat Chickpeas at night and would eat it again and eat it tomorrow morning and she did not eat Lord Vasudeva-Vasudeva (Sri Krishna - Sri Krishna). Slept while chanting.

In the middle of the night, some thieves sneaked in to steal the house of the Brahmin, the thief could not find anything, but there would be some money or valuable items in the bag, and the thieves keep stealing. Then Brahmani (Lady Priest) woke up from sleep and started thief-thief shouting so that the thief hid in Sandipani Ashram (Mythological School) for fear of being caught. Where Shri Krishna and Sudama were getting education, poor hungry, thirsty Brahmini (Lady Priest) said angrily (Shroff) that whoever eats the gram of my bundle will be poor for life. The thief left the gram vessel Sandipani Ashram, which Gurumata (Whole School Mother) was cleaning while cleaning in the morning.

In the morning, when Shri Krishna and Sudama were going to the forest to cut wood, Gurumata (Whole School Mother) gave a bundle of gram to satisfy hunger, then Sudama immediately took it. Sudama had future knowledge since childhood, he knew that whoever eats gram of this potloa will not be able to get out of poverty and poverty for life. Which Gurumata (Whole School Mother) gave both of them a bundle of gram to satisfy their hunger but Sudama ate the whole gram without telling his friend to Shri Krishna, because if Lord Krishna could eat this gram, he would be poor and poor would have made the whole world poor and poor, Sudama kept his friendship religion and ate gram himself.

Moral education- 

"A friend is the one who supports his friend even in the wrong time, even if he has to face the difficulties for himself"
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श्री किशन और सुदामा की दोस्ती

आज भी लोग दोस्ती की जब मिसाल देना होता है, तो कृष्ण और सुदामा दोस्ती का ही देते क्योंकि इनकी दोस्ती प्रगाढ़ता और मित्रता धर्म दोनों खूब निभायें चाहे समय उन दोनों के विपरीत क्यों न रहा हो. ऐसा शास्त्रों में कहा गया है!

भगवान् श्री कृष्ण बड़े संपन्न घर के थे और सुदामा गरीब ब्राम्हण परिवार (लेकिन पहले अमीर थे) से थे, लेकिन सुदामा के गरीब होने के पीछे उनकी कहानी है जो अपने प्रिय मित्र कृष्ण को बचने के लिए किया गया था! शास्त्रों में कहा गया है की एक ब्राम्हणी जो बहुत गरीब थी, रोज भिक्षा माँग के जीवनयापन करती थी लेकिन एक समय ऐसा आया की उसे लगभग 4 - 5 दिनों कुछ भी भिक्षा नहीं मिला, फिर अगले दिन उसे कुछ मुट्ठी चना (Chickpeas) मिला जिसे अपने पोटली में रख ली! वह अपने कुटिया पहुँचते तक बहुत रात हो गयी और ब्राम्हणी सोची कि चने (Chickpeas) को रात को नहीं खाउंगी और कल सुबह भगवान् को भोग लगा के फिर खाउंगी और उसने नहीं खाया भगवान् वासुदेव- वासुदेव (श्री कृष्ण - श्री कृष्ण) नाम जपते - जपते सो गयी!

मध्य रात्रि को कुछ चोर उस ब्राम्हणी के घर चोरी करने घुस गए, चोर को कुछ नहीं मिला लेकिन पोटली में कुछ पैसे या कीमती सामान होगा कर के चोर चोरी करते रहते है! तभी ब्राम्हणी नींद से जाग गयी और चोर - चोर चिलाने लगी जिससे चोर पकड़े जाने के डर से सांदीपनि आश्रम में जा के छिप गए! जहाँ श्री कृष्ण और सुदामा शिक्षा प्राप्त कर रहे थे उधर बेचारी भूखी, प्यासी ब्राम्हणी ने गुस्से में आ के कह दी (श्रॉफ) की जो भी मेरे पोटली के चना को खाएगा, वह जिंदगी भर के लिए गरीब हो जायेगा! चोर वह चने का पोतली संदीपनी आश्रम छोड़ के चले गए जो सुबह गुरुमाता साफ सफाई करते हुए पा गई!

सुबह जब श्री कृष्ण और सुदामा लकड़ी काटने जंगल जा रहे थे, तो गुरुमाता ने भूख मिटाने के लिए चना की पोटली दे दी तो सुदामा तुरंत ही ले लिया! सुदामा बचपन से ही ब्रम्हज्ञान (Future Knowledge) प्राप्त था, उनको पता था कि जो भी इस पोटलो का चना खाएगा, वह जिंदगी भर के लिए गरीब व गरीबी से नहीं उठ पायेगा! जो की गुरुमाता ने दोनों को भूख मिटाने के लिए चना की पोटली दी रही लेकिन सुदामा अपने दोस्त को गरीबी से बचने के लिए पूरा चना श्री कृष्ण को बिना बताये खा गया, क्योंकि श्री कृष्ण भगवान् यदि इस चना को खा जाते तो वे गरीब व दरिद्र हो जाते जिससे पूरी सृष्टि ही गरीब व दरिद्र हो जाती, सुदामा ने अपनी मित्रता धर्म निभाया और चने खुद खा लिया

नैतिक शिक्षा- 

“मित्र वही होता है जो गलत समय में भी अपने दोस्त का साथ दे, चाहे उसके लिए खुद को परिशानियों का सामना करना क्यों न ही पड़े”

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