Pride Chhattisgarh | Ajit Jogi Best Collector & Chief Minister (हिंदी में भी)


Journey from Village Path (Road) to Rajpath (Royal Road)


A child who was born in a poor family in the village and never let the lack of resources come among
first cm of chhattisgarh
First CM Chhattisgarh Ajit Jogi
his dreams and after reading and writing became the head of the state from the collector. No one else is the first Chief Minister of Chhattisgarh, Mr. Ajit Pramod Jogi.

Born 29 April 1946, Pandra, Bilaspur, Chhattisgarh.
Died 29 May 2020 (aged 74) Raipur, Chhattisgarh.

Received primary education from the missionary school of the village, Ajit Jogi was a brilliant student from the beginning. Due to which he went to Bhopal to do engineering. He completed his Bachelor of Engineering from the Mechanical Branch from the "Maulana Azad College of Technology" and achieved the University Gold Medal in 1968.

Then Lecturer in National Institute of Technology Raipur Chhattisgarh, but he did not stop. He prepared for UPSC and became IPS, then became IAS but his dream was something else. With the advice of some of his close politicians, he left the big post like collector and made his debut in politics and he held the Congress's hand.

Was a member of the Rajya Sabha (State Assembly) from Congress from the year 1986 to 1998.
Then in 1998, he was also a Lok Sabha (Member of Parliament) member and later an MLA from Raigarh.

And the time came when Madhya Pradesh was divided (1 November 2000) to form a new state named Chhattisgarh. Due to hard work and dedication in Ajit Jogi's politics, his party was made the chief of Chhattisgarh. Which was recorded in golden words on the pages of history forever.

He was the chief minister from 2000 to 2003, but due to the Congress party's crushing defeat in the 2003 assembly elections, he was denied his post.

Between 2003 and 2016, there were differences between him and some of his party's leaders, which upset the formation of the 2016 new party and was named "Janata Congress Chhattisgarh" of which he became the chief.

He also faced a lot of allegations such as the assassination of the NCP leader, who keeps going round the charges in politics.

It used to be said that the desire of man never ends, but those who have got the floor also have to work hard and diligently, once they tie the dreams, then it is very difficult to get them out of you even if it takes time but is achieved.
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गाँव के पथ से राजपथ का सफर

एक बच्चा जो गांव में गरीब परिवार में जन्मा और कभी भी संसाधनों की कमी को अपने सपनो के बीच आने नहीं दिया और पढ़ लिख कर कलेक्टर से राज्य का मुख्या बन गया. कोई और नहीं छत्तीसगढ़ के प्रथम मुख्यमंत्री श्री अजीत प्रमोद जोगी जी है.

जन्म 29 अप्रैल 1946 पेण्ड्रा, बिलासपुर, छत्तीसगढ़
मृत्यु 29 मई 2020 (74 वर्ष की आयु) रायपुर, छत्तीसगढ़.

प्राथमिक शिक्षा गांव के मिशनरी स्कूल से प्राप्त किया, अजीत जोगी जी शुरू से मेधावी छात्र थे. जिसके कारण उन्होंने इंजीनियरिंग करने के लिए भोपाल चले गए. "मौलाना आजाद कॉलेज ऑफ़ टेक्नॉलजी" से यांत्रिक शाखा (Mechanical Branch) से अभियांत्रिकी (Engineering) में स्नातक पूरा किया और 1968 में यूनिवर्सिटी गोल्ड मैडल हासिल किया.

फिर नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी रायपुर छत्तीसगढ़ में व्याख्याता (Lecturer) रहे लेकिन वो यही नहीं रुके. उसने यूपीएससी की तैयारी की और आईपीएस बने फिर आईएएस बने लेकिन उनका सपना कुछ और ही था. उनके कोई क़रीबी राजनेता की सलाह से कलेक्टर जैसे बड़े पद को छोड़ के राजनीती की तरफ पदार्पण कर लिए और उसने कांग्रेस का हाँथ थाम लिया.

वर्ष 1986 से 1998 तक राज्य सभा (State Assembly) के सदस्य रहे कांग्रेस से.

फिर वर्ष 1998 में रायगढ़ से लोकसभा (Member of Parliament) सदस्य और बाद में विधायक भी रहे.

और वो समय आया जब मध्यप्रदेश विभाजित (1 नवम्बर 2000) हो के एक नए राज्य बना जिसका नाम दिया गया छत्तीसगढ़. अजीत जोगी जी के राजनीती में मेहनत और लगन के कारण उनकी पार्टी ने छत्तीसगढ़ का मुख्या बना दिया गया. जो हमेशा के लिए इतिहास के पन्नों पर सुनहरे शब्दों में दर्ज हो गया.

वर्ष 2000 से 2003 तक मुख्यमंत्री रहे, लेकिन 2003 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी की करारी हार के कारण उनका उन्हें पद से वंछित होना पड़ा.

वर्ष 2003 से 2016 के बीच उनका और उनके पार्टी के कुछ नेताओं के साथ के बीच मतभेद चलता रहा जिससे परेशान हो के 2016 नई पार्टी का गठन कर लिया और नाम रखा गया "जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़" जिसके वो मुख्या बने.

उनके ऊपर बहुत आरोप भी लगे जैसेकि राकांपा नेता की हत्या, जो राजनीती में आरोप - प्रत्यारोप दौर चलते रहता है.

कहते कि इंसान की चाह कभी खत्म नहीं होता, लेकिन जिनको मंजिल मिली है उनको भी कड़ी मेहनत और लगन से कार्य करना पड़ता है, एक बार सपनो को बांध लिए तो उनको आप से छुड़ाना बहुत मुश्किल है भले समय लगेगा लेकिन हासिल हो के रहता है.

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