DadaBhai Naoroji | Great Politician Leader & Maker of Modern India (हिंदी में भी)

Dadabhai Naoroji Great Indian Patriot and Political Leader

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A person was born in British India who played a very big role in building modern India. Who put his voice before the immediate government to remove poverty and increase economic development and the slogan of Swadeshi (domestic) and Swarajya (freedom) was given to Indians.Which we call "The Creator of Modern India" and "The Grand Old Man of India" in Indian politics. Whose real name is Dadabhai Naoroji.

Born and Parents

Born on 04 Sep 1825 in Navarsi (Gujarat) in a prestigious Parsi and Parsi speaking family. Father's Name Mr. Noroji Palanji and Mother's Name Mrs. Mirakbai. His father's business was priestly and with little farming he used to feed for the house. 

Primary and Collage Education

At the age of 4, his father passed away, then his mother got admitted in the school of native language.He was in the midst of lack of primary education. He entered Elphinstone Institute (College), Mumbai Then the Chief Justice Mr. Askin Pari advised to go to London and offered to pay his full expenses but his mother refused. Later became the mathematics professor of the school. Then became the first Indian in the history of that time to become a professor of college mathematics and general science at the age of only twenty-five years. Still kept working in social work and education and teaching of girls.

Career Journey

At the age of 30, he got a chance to go to London from the work of a trading company. There, the people of England were made aware of the economic plight of India and the condition of the people.

Started business in 1859 under the name of “Noroji & Co.” then after Established London Indian association in 1866. Was a member of the Indian National Association before the formation of the Congress. Elected President of Congress session in 1886, 1893 & 1906. Gopal was also an advisor to Krishna Gokhale and Mahatma Gandhi. In 1869, he called a gathering from England to India and established the East India Association.
                                    In an attempt to explain and improve the economic condition of India and the tyranny of the British rule, he thought of contesting from England for the first time he lost the election.
                                     But for the second time again, he fought the Member of Parliament elections from the Liberal Party in which he won. He was the first Indian who became the United Kingdom House of Common from 1892 to 1895 and in the meantime passed a proposal to recruit Indians in the Civil Services in the British Parliament.

Special

Dada Bhai Naoroji also wrote a book called “Poverty India and Un-British Rule”.
Indian Postal Dedicated Stamp to Dadabhai Naoroji in 1963, 1997 & 2017.

Last Stage of Life

30 June 1917 was a very sad day when the patriarchal leader of the country who laid the foundation of economic India and dreamed of Swarajya (freedom), departed from the world forever at the age of 92, for the work done by this great figure forever indebted.

Talks by Dadabhai Naoroji


1.    We advance with the help of society that is why we should serve the society whole heartedly.

2.    In self-government is our hope, strength and greatness. I am a Hindu, a Muslim, a Parsi but above all an Indian first.

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दादाभाई नौरोजी महान भारतीय देशभक्त और राजनीतिक नेता

ब्रिटिशकालीन भारत में एक ऐसे व्यक्ति का जन्म हुआ जिनका आधुनिक भारत निर्माण बहुत बड़ा भूमिका रहा! जिसने गरीबी हटावो और आर्थिक विकास बढ़ाने के लिए अपनी आवाज तात्कालिन सरकार के सामने रखा एवं भारतीयो में स्वदेशी के प्रति प्यार और स्वराज्य का नारा रखा! जिसे हम लोग "आधुनिक भारत के निर्माता" भारतीय राजनीति के "भारत का भव्य बूढा" कहते है जिनका वास्तविक नाम दादा भाई नौरोजी है!
जन्म और माता-पिता

जन्म 04 सितम्बर सन् 1825 को प्रतिष्ठित पारसी पारसी बोलने वाले परिवार में नवरासी गुजरात में हुआपिता का नाम श्री नोरोजी पालनजी डोरडे माता का नाम श्री मति मिरक बाई!
इनके पिता जी का व्यवसाय पुरोहिती एवं थोड़ी बहुत खेती से घर के लिए भरण पोषण करते थे!

प्राथमिक और कॉलेज शिक्षा


4 वर्ष की आयु में इनके पिता जी चल बसे फिर इनकी माता ने देशी भाषा के विद्यालय में भर्ती करा दिए इनका प्राथमिक शिक्षा अभावों के बीच में हुआ! मुम्बई के एलफिंस्टन संस्थान (कॉलेज में प्रवेश किया फिर तत्कालीन मुख्य न्यायधीश श्री आसकिन पैरी लंदन जा के वकालत करने की सलाह दी एवं उसका पूरा खर्च देने का ऑफर किया लेकिन उनकी माँ ने मना कर दी बाद में विद्यालय के गणित प्राध्यापक बने. उसके बाद उस समय के इतिहास में पहले भारतीय बने जो महाविद्यालय गणित  सामान्य विज्ञान के प्राध्यापक बने मात्र पच्चीस साल के उम्र में फिर भी सामाजिक कामों तथा लड़कियों की शिक्षा  पढ़ाने में काम करते रहे!
कैरियर यात्रा

30 वर्ष की आयु में एक व्यापारिक कंपनी के काम से लंदन जाने का मौका मिला वहां भी इंग्लॅण्ड की जनता को भारत के आर्थिक दुर्दशा जनता की हालत को अवगत कराया सन् 1859 में नोरोजी एंड कंपनी के नाम से व्यापार शुरू किया सन् 1866 में लंदन इंडियन एसोसिएशन की स्थापना किया!
कांग्रेस के गठन के पहले इंडियन नेशनल एसोसिएशन के सदस्य रहे सन् 1886 में कांग्रेस अधिवेशन के अध्यक्ष चुने गए बाद में भी रहे सन् 1893 और सन् 1906-गोपाल कृष्ण गोखले और महात्मा गांधी के सलाहकार भी रहे!

सन् 1869 में इंग्लॅण्ड से भारत के सभा बुलाया और ईस्ट इंडिया एसोसिएशन की स्थापना किया! भारत की आर्थिक दशा और ब्रिटिश शासन के अत्याचार को बताने  सुधारने के प्रयास में उन्होंने इंग्लॅण्ड से चुनाव लड़ने का सोचा पहली बार चुनाव में हार गए!
                      परन्तु दूसरी बार फिर से लिबरल पार्टी से मेंबर ऑफ पार्लियामेंट चुनाव लड़े जिसमे वो जीत गए वो पहले भारतीय थे जो यूनाइटेड किंगडम हाउस ऑफ कॉमन बने सन् 1892 से सन् 1895 तक और इस बीच ब्रिटिश पार्लियामेंट में भारतीयों को सिविल सर्विसेज में भर्ती करने का प्रस्ताव पारितकराया!
विशेष

दादा भाई नौरोजी ने पुस्तक भी लिखी जिसका नाम है भारत में गरीबी और गैर-ब्रिटिश शासन!
भारतीय डाक विभाग ने दादाभाई नौरोजी को डाक टिकट समर्पित है (सन् 1963, 1997 और 2017).

जीवन के अंतिम अवस्था


30 जून  सन् 1917 का बहुत दुखद दिन था जब आर्थिक भारत के नींव रखने वाले और स्वराज्य का सपना आँखों में लिए देश का पितामाह नेता 92 वर्ष की आयु में दुनिया से हमेशा के लिए विदा हो गए देश इस महान हस्ती के द्वारा किये गए कार्यों के लिए सदैव ऋणी रहेगा

दादाभाई नौरोजी द्वारा वार्ता


1."हम समाज की सहायता से आगे बढ़ाते है इसी लिए हमें भी पुरे मन से समाज की सेवा करनी चाहिए!"
2."स्वशासन में हमारी आशा, दृढ़ और महानता है। मैं एक हिंदू एक मुस्लिम एक पारसी हूं लेकिन सबसे पहले एक भारतीय हूं"!

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