Biography | Worlds Famous Philosopher Socrates (हिंदी में भी)


The Great Philosopher Socrates

Socrates, the great philosopher who played a role in ego laying the foundation for the
Great Philosopher Socrates
development of Western civilization, who took the initiative to show the right path to people in the world on the topics of God, creation, religion, ruler, subjects, knowledge, satyadarshan (Truth ways) etc.

Born about 469 BC in Athens, Greece (prosperous state of Greece), and the father was a sculptor and mother housewife, his father did not live well financially, was able to live very hard, with the help of a person named Krito. Because Socrates had been a repository of knowledge since childhood and was also very brave.

He was not interested in his father's work, so he opened the school and the children were beginning to question those who presently called themselves scholars on the Socrates question until they got the right answer, which caused the scholars Due to his talent and unique knowledge, he started to get jealous and gradually his fame increased and people could see the truth in his words and they answered every question correctly and accurately.

Then he was married to a girl named Enthipe but she was never a successful wife as she always kept calling Socrates a bad friend, later they had three sons.

In the middle of life, Socrates always used to tell people that God is one and it is wrong to worship different gods and goddesses. This confuses the mind. It is necessary to perform duties towards our society's national interest, because the country is bigger than the person, so it is more than the ruler. We should just do patriotism! Do not run after worldly pleasures, do the work of religion, earn knowledge, so that there is knowledge of truth, etc.

He also had two disciples Plato Aflatoon and then Ariston Aristotle who supported his idea in the society and continued to awaken the public even after he left, and even today when one of the great philosophers is named, Plato Aflatoon after Socrates and Ariston Aristotle's name only comes.

The immediate ruler of Athens, Fairy Cleese, highly respected Socrates, but after he died, Cloyne became the ruler who was arrogant, foolish and ignorant, did not like Socrates, then his antagonists went evil to the ruler and then The matter went so far as to make him want to remove the road forever.
At the last moment, around 399 BC, he was falsely accused of provoking people and young people towards the rule and taking the path of unrighteousness, and another atheism, the ruler told Socrates that we will forgive you if you feel sorry If you apologize to us for the allegations, then he said that I apologized, then the truth will be lost and I still kept on saying that on the path of truth and religion, my whole hard work will return, that is why I do not apologize He was then prosecuted and adjudicated and sentenced to death by the ruler, Cloyne, at that time the death penalty was served as a cup of poison.

Plato, Aristotle and the jailer thought of running away from jail, but Socrates refused, saying that I would not go against the law of my country, it would be an insult to the country and then the next day the jailer came with a cup of poison and told them that I am sorry He said that you are doing your duty, this is life! Before drinking the poison, he humbly bowed to Krito and borrowed the cock from Sculopus, would you have missed his money and drunk the cup of poison, the body slowly turned blue, and the prison authorities confirmed the death.

The life of a great philosopher has come to an end today, yet he is not yet speaking the words of God, principles, truth, religion and knowledge has been the inspiration of our lives and new generations.

Said by them
"Do not accept anything just like that, you think deeply about it and examine its merits and demerits”
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 महान दार्शनिक सुकरात (Socrates)

पश्चिमी सभ्यता के विकास में की नींव रखने में अहम् भूमिका का निभाने वाले महान दार्शनिक सुकरात जिन्होंने दुनिया में ईश्वर, सृष्टि,धर्म,शासक, प्रजा, ज्ञान,सत्यदर्शन आदि विषयों को लेकर लोगो को सही राह बताने का पहल किया!

जन्म लगभग 469 ईसा पूर्व एथेंस यूनान (यूनान का समृद्ध राज्य) में हुआ पिता एक मूर्तिकार तथा माता गृहणी थी इनके पिता की आर्थिक स्थित ठीक नहीं रह करती थी बड़ी मुश्किल से जीवन यापन कर पा रहे थे शुरुवाती शिक्षा भी क्रीटो नामक व्यक्ति के मदद से की क्योंकि सुकरात बचपन से ही ज्ञान का भंडार रहे व बहुत बहादुर भी थे!

उनका अपने पिता के काम में रूचि नहीं थी तो उसने स्कूल खोल लिया और बच्चो पड़ने लगे थे जो वर्तमान में अपने आप को विद्वान् कहते थे उनसे सुकरात प्रश्न के ऊपर प्रश्न किया करते थे जब तक उनको सही जवाब नहीं मिल जाता था जिस कारण विद्वान् लोग उनकी इस प्रतिभा और अद्वितीय ज्ञान के कारन ईर्षा करने लग गए धीरे-धीरे इनकी प्रसिद्धि बढ़ती गई और लोगों को उनकी बातों में सच्चाई झलक दिखाई देती थी वो हर प्रश्न का उत्तर सही और सटीक देते थे!
फिर उनका विवाह एनथिपे नाम की लड़की के साथ हुआ लेकिन वो कभी भी सफल पत्नी नहीं थी क्योंकि हमेशा सुकरात को बुरा भाल कहती रहती थी बाद में इनके तीन पुत्र पैदा हुआ!

जीवन के मध्य सुकरात हमेशा लोगो से कहते थे कि ईश्वर एक है और और अलग अलग देवी देवता का पूजा करना गलत है इससे दिमाग भ्रमित होता है अपने समाज देशहित के प्रति कर्तव्यों का पालन करना जरुरी है क्योंकि देश व्यक्ति से बड़ा है शासक से भी अतः हमें सिर्फ देश भक्ति करना चाहिए! सांसारिक सुखों के पीछे न भागे धर्म का काम करे, ज्ञान की कमाई करे, ताकि सत्य का ज्ञान हो आदि आदि.!

उनके दो शिष्य भी थे प्लटो अफ़लातून और उसके बाद अरिस्टोन अरस्तु जो इनके विचार को समाज में आगे बढ़ाने में साथ दिया और उनके जाने के बाद भी जनजागरण करते रहे और आज भी जब कोई महान दार्शनिकों नाम लिया जाता है तो सुकरात के बाद प्लटो अफ़लातून और अरिस्टोन अरस्तु का ही नाम आता है!

एथेंस के तात्कालिक शासक परी क्लीज सुकरात का बहुत ही सम्म्मान करते थे लेकिन उसके देहांत हो जाने के बाद क्लोयोंन शासक बना जो घमंडी, मूर्ख व अज्ञानी था सुकरात को पसंद नहीं करता था फिर उसके विरोधी लोगो ने शासक के पास जाकर बुराई करते थे और फिर बात इतनी आगे तक हुआ कि उसे सदा के लिए रस्ते हटाने का मन बना लिए!

अंतिम क्षण लगभग 399 ईसा पूर्व उनके ऊपर झूठा आरोप लगाय गया की प्रजा और नवयुवको को शासन के प्रति भड़काने और अधर्म के रास्ते ले जाना और दूसरा नास्तिकता फैलाने लोगो के बीच, शासक ने सुकरात से कहा की हम तुम्हे माफ़ कर देंगे यदि अपने ऊपर लगे आरोपों के लिए हम से माफ़ी मांग लो तो उसने कहा मैं माफ़ी माँग लिया तो सत्य की हार हो जायेगी और मैं अभी तक यही लोगो कहता रहा कि सत्य और धर्म की राह पे चलो मेरी पूरी मेहनत पे पानी फिर जायेगा इसी लिए मैं माफ़ी नहीं मांग सकता उसके बाद उनके ऊपर मुकदमा चलाया गया और निर्णय लिया गया और शासक क्लोयोंन ने मौत की सजा सुनाया गया उस समय मौत की सजा जहर का प्याला पिला के किया जाता था!

प्लटो, अरस्तु और जेलर जेल से भागने का सोचे लेकिन सुकरात ने मना कर दिया कहा कि मैं अपने देश के कानून के खिलाफ नहीं जाउंगा इससे देश का अपमान होगा और फिर अगले दिन जेलर जहर का प्याला ले के आया और उनसे कहने लगे कि मुझे क्षमा कर देना तो उन्होंने कहा कि आप अपना कर्तव्य का पालन कर रहे है यही तो जीवन है!  जहर पीने से पहले क्रीटो से विनम्रतापूर्वक हस्ते हुये बोले की स्कुलोपस से मुर्गा उधार लिया था क्या तुम उसका पैसा चूका दोगे और जहर का प्याला पी गए शरीर धीरे धीरे नीला होता गया जेल अधिकारियो ने मृत्यु की पुस्टि कर दिया!
एक महान दार्शनिक की जिंदगी थम गई आज वो नहीं है फिर भी उनके द्वारा कही बातें ईश्वर, सिद्धांत, सत्य, धर्म ज्ञान हमारे जीवन और नई पीढ़ियों के प्रेरणा रहा है!
उनके द्वारा कही बाते
“किसी बात को यूँ ही स्वीकार मत कर लो, तुम उसके बारे में गहराई से सोच कर गुण और अवगुण परख कर लो अच्छी लगे तो स्वीकार नहीं त्याग दो

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