Biography | Indian Best Businessman Leader & Philanthropist (हिंदी में भी)

Great businessman, philanthropist, and former chairman of Tata Breath

Business guru
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The identity of a great man would have been unique, who achieved the goal according to his hard work and his rules, similarly on the basis of his young age and hard work, today Mr. Ratan Naval Tata Ji is known to the whole world as a great and successful businessman Even today, we are dedicated to our country and society who have the greatest wealth such as simple personality, commitment, prestige, honesty ideology etc. which makes them different from other businessmen.

Introduction: - 

Name- Shri Ratan Naval Tata, born on 28 December 1937 in a Parsi family which is located in Surat, Gujarat India! Father- Naval Tata, Mother- Suni Tata, Step Mother- Simon Tata, Bhai Noel Tata (Step Brother).
Primary Education: -
Campion School Mumbai (Primary), Cathedral and John Kanan School Mumbai (Secondary), College Education: - 1959 Cornell Degree in architecture from the university, participated in Harvard Business School's seven-week Advanced Management Program in 1975.

Career: - 

Mr. Ratan Tata started his career with the Tata group in the year 1961 as he had worked in some places abroad before coming to India! Ratan Tata Ji, with his talent and ability, continued to work with the Tata group and the companies and, always seeing his hard work and dedication to work with something new and better thinking, he was made the chairman of Tata Industries in 1981.

He took his business to the top with values, prestige, commitment, honesty, personality, ideology all these things in mind when J. R. D. (Tata his grandfather) relinquished the post of Group President, Ratan Tata Ji was made succession and showed that he was qualified for the post, he served Tata Steel, Motors, Power Tata, Consultancy Services, Tata Tea, Tata Chemical, Indian Hotels and Tata Tele Services have reached the pinnacle of the height.

Then in the year 1998, Tata Motors introduced the Indian passenger car Tata Indica, which did not meet the expectations in the Indian market, which they thought of selling and but did not give up and went ahead with the passenger tax and was successful. The purchase of the brand Jaguar Land Rover car maker in January 2008 was a huge achievement, before Tata Tea bought Tetley and on 02 April 2007 Tata Steel bought Corus on 10 March 2000.

They had a dream that To make the lowest price of small car in India and the world, it also launched the Tata Nano car on 21 January 2007 which was kept in India for only 1 lakh rupees, which is known as Lakhtakia car in India.

Similarly, he continued to achieve the milestone of his group and left the position of chairman of the group from 1991 to 2012 on 28 December 2012, but remained the charitable trust chairman of the group, still working in every field for India and Indians. He is a successful businessman as well as a successful person who understands human suffering.

Controversy: (1) in 1997, Indian Express journalist found her name involved in tape scandal. (2)Local logo faced in Singur West Bengal for its Tata Nano car factory

Awards: - Padma Bhushan (third major honor India) in the year 2000, Padma Vibhushan (second major honor India) in the year 2000 (and many more).

Talks by
"Keep all those stones that people throw at you and use those stones to build a strong monument" 
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महान व्यवसायी, परोपकारी और टाटा ब्रीथ के पूर्व अध्यक्ष

एक महान इंसान की पहचान अनोखा होता जो अपनी कड़ी मेहनत और अपने नियमों के अनुसार लक्ष्य को हासिल करता है, इसी तरह अपनी कम उम्र और मेहनत के दम पर आज श्री रतन टाटा जी को पूरा विश्व एक महान और सफलतम व्यवसायी के रूप में जाने जाते जो आज भी अपने देश और समाज के लिए समर्पित है |जिनके पास सबसे बड़ा धन है, जैसेकि सरल व्यक्तित्व मान प्रतिबद्धता प्रतिष्ठा ईमानदारी विचारधारा इत्यादि जो इन्हे दूसरे व्यवसायी अलग बनाता है!

परिचय :- 

नाम- श्री रतन नवल टाटा, जन्म 28 डिसम्बर 1937 को पारसी परिवार में हुआ जो स्थित है सुरत, गुजरात इंडिया!  पिता -नवल टाटा, माता- सुनि टाटा, सौतेली मां -सिमोन टाटा, भाई नोएल टाटा (सौतेला भाई)|
       
प्राथमिक शिक्षा:- कैंपियन स्कूल मुंबई (प्राथमिक), कैथेड्रल और जान कानन स्कूल मुंबई (माध्यमिक),
महाविद्यालय शिक्षा:- 1959 कॉर्नेल विश्वविद्यालय से आर्किटेक्चर में डिग्री, 1975 में हार्वर्ड बिजनेस स्कूल के सात सप्ताह के उन्नत प्रबंधन कार्यक्रम में भाग लिया!

करियर:- 

श्री रतन टाटा अपना करियर वर्ष 1961 में टाटा समूह से आरम्भ किया क्योंकि वह भारत आने से पहले विदेश में कुछ जगह काम कर चुके थे! रतन टाटा जी अपने हुनर और काबिलियत से टाटा समूह और कम्पनियो लगातार कार्य करते रहे और हमेशा कुछ नया और बेहतर सोच के साथ काम किये उसकी इस मेहनत और लगन को देखते हुए, उसे वर्ष 1981 में टाटा इंडस्ट्रीज का अध्यक्ष बना दिया गया!
वह अपने व्यापार को मान, प्रतिष्ठा, प्रतिबद्धता, ईमानदारी, व्यक्तित्व, विचारधारा इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए शिखर तक ले गए जब जे. आर. डी. (टाटा उनके दादा जी) ने समूह अध्यक्ष पद को छोड़ दिए तो रतन टाटा जी को उत्तराधिकार बना दिया गया और उन्होंने साबित कर के दिखाया दिया कि वह इस पद के योग्य है, उन्होंने टाटा स्टील, मोटर्स ,पावर टाटा, कंसलटेंसी सर्विसेस, टाटा टी, टाटा केमिकल, इंडियन होटल्स और टाटा टेली सर्विसेस को बुलंदी के शिखर तक पहुंचा दिया है!

फिर वर्ष 1998 में टाटा मोटर्स भारतीय यात्री कार टाटा इंडिका पेश किया जो उम्मीदों पे खरा नहीं उतर पाया भारतीय बाजार में, जिसे वो और उनके बेचना का सोच लिया लेकिन हिम्मत नहीं हारी और फिर से यात्री कर आगे बढ़ाया और सफल हुवे साथ ही,उन्होंने 18 जनवरी 2008 को ब्रांड जगुवार लैंड रोवर कार निर्माता कंपनी को खरीद जो बहुत बड़ी उपलब्धि थी, इससे पहले 10 मार्च 2000 को टाटा टी ने तेतले (Tetley) और 02 अप्रैल 2007 टाटा स्टील ने कोरस (Corus) को खरीद लिया था उन्होंने एक सपना देखा कि भारत व दुनिया की सबसे कम कीमत की छोटी कार बनाने की वह भी 21 जनवरी 2007 को टाटा नैनो कार लांच कर दिया जो भारत में मात्र 1 लाख रुपया रखा गया था जिसे भारत में लखटकिया कार के नाम से जाना जाता है!

इसी तरह अपने समूह को आगे मील का पत्थर हासिल करते गए और 1991 से 2012 तक समूह अध्यक्ष रहे 28 दिसम्बर 2012 को अध्यक्ष पद छोड़ दिए लकिन समूह के चैरिटेबल ट्रस्ट अध्यक्ष बने हुए थे फिर आज भी भारत और भारतवाशियों के लिए हर क्षेत्र में काम कर है वह सफल व्यवसायी के साथ-साथ एक सफल इंसान भी है जो इंसान की तकलीफों को समझता है!

विवाद:- (1)वर्ष 1997 में इंडियन एक्सप्रेस की पत्रकार के द्वारा उनका नाम टेप स्कैंडल में संलिप्त पाया जाना! (2) अपने टाटा नैनो कार कारखाने के लिए सिंगुर पश्चिम बंगाल में स्थानीय लोगो प्रतिरोधक सामना करना पड़ा!

पुरस्कार:-  वर्ष 2000 में पद्म भूषण (तीसरा बड़ा सम्मान भारत)! वर्ष 2008 पदमविभूषण (दूसरा बड़ा सम्मान भारत) (और बहुत)

इनके द्वारा कही गई बाते

"उन सारे पत्थरों कोअपने रख ले जिसे लोग आप पर फेंकते हैं और उन पत्थरों का प्रयोग एक मजबूत स्मारक बनाने में करे"

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